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Hanuman Chalisa | श्री हनुमान चालीसा

जय श्री राम जय श्री बालाजी महाराज आप सभी हनुमान चालीसा तो प्रतिदिन पढ़ते ही होंगे क्या आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa में कितनी शक्ति होती है इसको प्रतिदिन पढ़ने से जीवन का अंधकार दूर हो जाता है और उजाले की तरफ बढ़ता है।

प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से भूत प्रेत पिशाच दूर रहते हैं तथा बिगड़े हुए काम आसानी से बन जाते हैं और यह भी माना जाता है कि हम जो भी कार्य करते हैं अगर बालाजी का नाम लेकर करें तो उन में अवश्य सफलता मिलती है। क्योंकि जो धंधा हम करते हैं अगर बालाजी का हनुमान जी का फोटो रखते हैं और उनकी प्रतिदिन पूजा करते हैं तो हमारे बैलेंस शीट और काम को बालाजी चलते हैं फिर हमें कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती जय श्री राम जय श्री बालाजी महाराज

Shree Hanuman Chalisa

Shree Hanuman Chalisa | श्री हनुमान चालीसा

दोहा –

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥

Shree Hanuman Chalisa

चौपाई –

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।। 

राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनी पुत्र पवनसुत नामा ।।

महावीर विक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन विराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ।।

हाथ बज्र ओ ध्वजा बिराजे । कंधे मूंज जनेऊ साजे।।

शंकर सुमन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जग वंदन ।।

विद्यावान गुनी अति चतुर । राम काज करिबे को आतुर ।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा । विकट रूप धरि लंक जरावा ।।

भीम रूप धरि असुर संहारे । राम चंद्र जी के काज संवारे ।।

लाए सजीवन लखन जियाये ।श्री रघुवीर हरषि उर लाये ।।

रघु पति किन्हीं बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।

सहस बदन तुम्हारो जस गावे । अस कहि श्री पति कंठ लगावे ।।

सनकादिक ब्रह्मदि मुनीषा । नारद सारद सहित अहिंसा ।।

यम कुबेर दिगपाल जहां ते । कवि को विद कहि सके कहां ते ।।

तुम उपकार सुग्री वहि किन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ।।

तुम्हारो मंत्र विभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ।।

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लिल्यो ताहि मधुर फल जानू ।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गए अचरज नाही ।।

दुर्गम काज जगत के जेतेे । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।

राम दुवारे तुम रखवारे । होत ना आज्ञा बिनु पैसारे ।।

सब सुख लहे तुम्हारे सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ।।

आपन तेज सम्हारो आपे । तीनो लोक हांक ते कांपे ।।

भूत पिशाच निकट नहीं आवे । महावीर जब नाम सुनावे ।।

नस रोग हरे सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।

संकट ते हनुमान छुड़वे । मन कर्म वचन ध्यान जो लावे ।।

सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ।।

और मनोरथ जो कोई लावे । सोई अमित जीवन फल पावे ।।

चारों जुग प्रताप तुम्हारा । है प्रसिद्ध जगत उजियारा ।।

साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ।।

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हारे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।।

तुम्हारे भजन राम को पावे । जन्म जन्म के दुख बिसरावे ।।

अंत काल रघु भरपूर जाई । जहां जन्म हरि भक्त कहांई ।।

और देवता चित्त ना धराई । हनुमत सेई सर्व सुख करहि ।।

संकट कटे मिटे सब पीरा । जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ।।

जय जय जय हनुमान गोसाई । कृपा करो गुरुदेव की नाई ।।

जो सत बार पाठ कर कोई । छुटहि बंदि महा सुख होई ।।

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा । होय सिद्ध साखी गौरी सा ।।

तुलसी दास सदा हरि चेरा । किजै नाथ हृदय महाँ डेरा ।।

दोहा –

पवन तनय संकट हरण, मंगल मूर्ति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहुं सुरभूप।।

इति श्री हनुमान चालीसा | Shree Hanuman Chalisa

बोलो सियावर राम चंद्र की ! जय

बोलो पवनसुत हनुमान की ! जय

बोलो बाला जी महाराज की ! जय

मेरे प्रभु राम जय जय राम सियावर राम जय जय राम

हर हर महादेव

Shree Hanuman Chalisa | श्री हनुमान चालीसा

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