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पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा, कब्ज के लक्षण, कारण व बचाव | Homeopathic Medicine For Constipation Treatment In Hindi 

आजकल बिगड़े खान-पान के कारण कब्ज की समस्या बहुत अधिक देखने को मिलती है या फिर यूं कहें कि यह एक आम समस्या हो गई है आज हम कब्ज होने के कारण लक्षण तथा पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा भी बताएंगे जिसको अपना कर आप कब्ज से छुटकारा पा सकेंगे तो बने रहे मेरी पोस्ट में और जानिए कि वह कौन-कौन सी दवाएं हैं जिसका प्रयोग है प्रतिदिन कर सकते हैं।

Homeopathic Medicine For Constipation Treatment In Hindi 

कभी-कभी तो मल साफ करने के लिए लोगों को सिगरेट का सहारा लेना पड़ता है जिसके कारण को घंटों बैठकर मल तैयार करते हैं तब जाकर कहीं उनका पेट साफ होता है। यदि आप भी समस्या से परेशान हैं तो फिर आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा जिसको आप प्रतिदिन सेवन करके अपने पुरानी से पुरानी कब्ज से छुटकारा पा सकेंगे।

1. कब्ज क्या है? | what is constipation 

मल साफ ना आने को कब्ज कहते हैं। यदि आपका पेट साफ नहीं होता है तो फिर यह कब्ज की समस्या है। कब्ज रोग से पीड़ित होने से 2 से 3 दिनों मल त्याग हेतु नहीं जाते हैं मन विसर्जन के लिए जाने पर मल कम मात्रा में सख्त और सूख जाता है।

लंबे समय से कब्ज होने पर यहां अनेक बीमारियों को जन्म देता है यदि कब्ज होने की आशंका हो तो फिर आपको इसका इलाज कराना चाहिए समय पर इसका इलाज होने पर या जड़ से समाप्त हो सकती है और अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

प्रायः सामान्य एक मनुष्य 1 दिन में 1 या 2 बार मल त्याग हेतु जाता है। लेकिन कई व्यक्ति 1 दिन में लगभग 3 से 4 बार तक मल त्याग हेत जाते हैं, और बहुत से लोग तो कई-कई दिन तक  मल त्याग करने को ही नहीं जाते हैं, ऐसे व्यक्तियों को कब्ज का रोग कष्ट का कारण बनता है।

और कई घंटे तक मल त्याग के  लिए बैठना पड़ता है परंतु उसे बहुत कम मात्रा में मल निकलता है,  इससे रोगी और भी अधिक परेशान हो जाता है, तथा उसको आलस्य, सुस्ती, सिरदर्द, कब्ज के कारण पेट में दर्द, किसी भी काम को करने में मन नहीं लगता है, मानसिक दबाव तथा चिड़चिड़ा स्वभाव आदि लक्षण बनने लगते हैं।

2. कब्ज होने के कारण | due to constipation 

अब तक आपने जाना क्रिकब्ज क्या है आइए जानते हैं कब्ज के लक्षण तथा पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा के बारे में तो बने रहे हमारी पोस्ट में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी जानकारी आपको अच्छी लगे तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके अवश्य बताएं।

-शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाना।

-यह रोग आंतों में उत्पन्न होता है तथा लीवर की कार्य क्षमता कम होना भी इसके मुख्य कारण है।

-तली भुनी चीजों का अत्यधिक सेवन करने से जैसे बर्गर, समोसा, ऐसी चीजें खाने से जिनमें तेल की मात्रा अधिक हो कब्ज का कारण बनती है।

-तेज चटपटे, मिर्च मसाले युक्त भोजन तथा खट्टे मीठे, तले  पदार्थों का अधिक सेवन करने से।

-पाचन शक्ति से अधिक मात्रा में भोजन करना।

-लंबे समय तक धूप में कार्य करने से पानी की कमी के कारण कब्ज की समस्या हो जाती है।

-अधिक मात्रा में परिश्रम करने से कब्ज की समस्या हो जाती है।

-अंग्रेजी औषधियों के सेवन करने से कब्ज की समस्या हो जाती है।

-प्रतिदिन गरिष्ठ भोजन का सेवन करने के कारण से कब्ज की समस्या को बढ़ावा मिलता है।

-भूख से अधिक भोजन का सेवन करने का कारण ।

-मैदे से निर्मित पदार्थों का अधिक सेवन करने से कब्ज अधिक बनती है।

-किसी रोग का ऑपरेशन और उसके साथ लंबे समय तक अंग्रेजी औषधि का सेवन करने के कारण से कब्ज बनती है।

3. कब्ज के लक्षण | kabj ke lakshan 

आइए जानते हैं कब्ज के लक्षण तथा पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा भी जानते हैं।

•कब्ज के रोगी को भूख बहुत कम लगना।

•शरीर कमजोर हो जाना व आलस्य आने लगना।

•कभी-कभी सिर भारी भारी सा रहना।

•कब्ज में अक्सर जी मिचलाना।

•कब्ज के रोगी को खट्टी मीठी डकारों का आना।

•रोगी को चक्कर आना या महसूस होना।

•गुदाद्वार से गैस का निकलना।

•कब्ज होने से पेट खराब रहता है जिसके कारण जीभ फटी-फटी वा सफेद होना।

•पेट में कब्ज होने पर किसी भी कार्य करने में मन नहीं लगना।

•पेट में भारीपन रहना तथा मीठा मीठा दर्द होना।

•कब्ज में अक्सर मल साफ ना होना तथा कम मात्रा में सूख हुआ निकलना। 

•कब्ज के रोगी के शरीर में भारीपन वा थकावट रहना।

• कभी-कभी मुख से दुर्गंध की अनुभूति होना।

• रक्त दूषित हो जाने के कारण ब्लड प्रेशर घटना वा बढ़ना जाना ।

•ज्यादा समय से कब्ज की समस्या से के कारण से बवासीर व सायटिका जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती हैं।

• रोगी को खाना खाने में कोई स्वाद न मिलना।

• किसी किसी रोगी को चाय या सिगरेट का सेवन किए बिना मल त्याग ही नहीं होता है।

• मलद्वार/काँच का नीचे खिसक जाना।

• शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण बड़ी आंत में सूजन हो जाना।

•लंबे समय से कब्ज होने पर बवासीर की समस्या बन जाना।

• हर तीसरे चौथे दिन पेट में ऐठन व मरोड़ होना यह भी पेट में कब्ज होने का संकेत है। 

4. कब्ज में क्या खाएं | kabj me kya khaye

• प्रातः समय उठकर प्रतिदिन दो से तीन गिलास ताजा पानी पीना चाहिए। 

• हरी सब्जी, बथुआ, पालक, लौकी, आम, अंगूर, किशमिश, मुनक्का, खजूर, संतरा, नाशपाती, एवं कागजी नींबू के रस का उपयोग करना चाहिए।

• हल्का भोजन करना चाहिए जो शीघ्र ही पच जाए तथा पौष्टिक आहार ही लेना चाहिए ।

•प्रतिदिन 8 से 10 गिलास जल का सेवन करें।

• प्रतिदिन दो बार नियमित रूप से शौच करने जाना चाहिए।

• हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए।

• प्रतिदिन सुबह खाली पेट नाश्ते में फलों का सेवन करना चाहिए।

•सुबह नाश्ते में पपीते का सेवन करना कब्ज के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है।

•50 से 100 ML. की मात्रा में लौकी का जूस पीने से कब्ज की समस्या में लाभ मिलता है।

5. कब्ज में क्या ना खाएं। Kabj mein kya na khayen

•बासी भोजन और अधिक तैलीय आहार का सेवन ना करें।

•तली भुनी चीजों का सेवन कम करना चाहिए।

•कभी भी भूख से अधिक नहीं खाना चाहिए।

•रात्रि में जितनी भूख लगी हो उससे कम ही भोजन करना चाहिए।

•रात्रि में कभी भी ठोस भोजन ना करें। जैसे- चना अरहर की दाल मसूर की दाल इत्यादि।

•सुबह खाली पेट कभी भी तली भुनी चीजों का सेवन ना करें सबसे पहले भोजन करें उसके बाद अन्य किसी चीज का सेवन करें।

6. होम्योपैथिक दवा में परहेज 

-होम्योपैथिक दवाओं के सेवन काल में कच्चा, लहसुन, प्याज, खुशबूदार, चीजों का सेवन ना करें।

-यदि आप हमें होम्योपैथिक का सेवन करना चाहते हैं तो सभी प्रकार के नशे को बंद करना पड़ेगा तभी होम्योपैथिक औषधि अच्छे से काम करेगी।

-यदि पूर्ण लाभ लेना है तो फिर होम्योपैथिक दवा में परहेज करना बहुत जरूरी है।

-दवाई का सेवन नियमित रूप से समय पर करने से ही पूर्णतया लाभ मिलेगा।

7. कब्ज के लिए योगा  | kabj ke liye yoga  

•सुबह के समय बाहर टहलने जाना चाहिए। करने नहीं जाना चाहिए तथा सुबह स्नान करना अच्छा होता है।

•सूर्य के उगने से पहले चारपाई से उठ जाना चाहिए।

-कब्ज को आप इन योगासन से भी ठीक कर सकते हैं

•भुजंगासन।

•वक्रासन।

•सूर्यनमस्कार।

•पश्चिमोत्तासन।

•उदराकर्षणासन।

यदि आप बहुत पुरानी कब्ज से परेशान हैं तो फिर आपको पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा के साथ-साथ योगासन करना भी अत्यंत आवश्यक है तथा यदि योगासन नहीं कर सकते हैं तो फिर आप सुबह सूर्योदय से पहले उठकर एक से आधा किलो मीटर तक टहलने अवश्य जाएं।

8. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा | 

होम्योपैथिक औषधि के सेवन काल में किसी प्रकार की सुगंधित चीज व किसी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए यदि आप पूर्णतया लाभ लेना चाहते हैं तो फिर आपको होम्योपैथिक औषधि का सेवन करते समय इन विशेष बातों का ध्यान रखना पड़ेगा।

पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा यह औषधि बहुत ही कारगर है बस इसका इस्तेमाल आप ठीक प्रकार से करें तो फिर आपको कब्ज की समस्या कभी नहीं होगी।

1. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा 

नक्स वोमिक (Nux Vomica) 30CH या 200 – 9 से 10 बूंद की मात्रा में दिन में 3 से 4 बार आधा कप पानी में मिलाकर सेवन करे, यह औषधि उन रोगियों के लिए है जो लोग दिन भर बैठ कर कार्य करते हैं। साधारण कब्ज में इस औषधि का प्रयोग किया जाता है।

2. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा

ग्रेफाइट्स (Graphites) 30CH – 9 से 10 बूंद की मात्रा में दिन में तीन से चार बार आधा कप पानी में मिलाकर सेवन करें। यदि आप का मल कड़ा और बड़े-बड़े टुकड़ों में आंव से लिपटा हुआ निकलता है तो इस औषधि का सेवन करने से यह समस्या दूर हो जाएगी। 

3. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा 

एल्यूमिना (Alumina) 30CH – 10 से 12 बूंद की मात्रा में दिन में 4 बार आधा कप पानी में मिलाकर सेवन करें। इस औषधि का प्रयोग करने से आप का मल का कड़ापन दूर होगा और मल ठीक प्रकार से साफ होगा मल त्याग करने में कष्ट को दूर कर देगी।

4. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा

कास्टिकम (Causticum) 30CH – 9 से 10 बूंद की मात्रा में आधा कप पानी में मिलाकर दिन में तीन से चार बार इस औषधि का सेवन करें। इस औषधि का प्रयोग बार-बार मल जाने की इच्छा मल सूख जाना वा कड़ा होना इस अवस्था में इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है।

5. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा 

प्लम्बम मैट (Plumbum Met.) 30CH – 9 से 10 बूंद की मात्रा में आधा कप पानी में मिलाकर दिन में तीन से चार बार इस औषधि का सेवन करने से कब्ज समाप्त हो जाती है। यह औषधि कब्ज के लिए रामबाण औषधि है। इस औषधि का सेवन करने से हाजमा दुरुस्त रहता है और मल अच्छे प्रकार से साफ होता है और साथ ही पेट का दर्द भी समाप्त हो जाता है।

6. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा 

ओपियम (Opium) 30CH – 4 से 5 बूंद की मात्रा में दो से तीन बार आधा कप पानी में मिलाकर सेवन करें। यह औषधि जब आप कमल छोटे-छोटे गोलियों की तरह निकल रहा हो और हाजमा बिल्कुल भी सही ना हो कई दिनों से मल ना हुआ हो और बहुत ज्यादा दर्द हो यह औषधि रामबाण का कार्य करती है। 

7. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा 

ब्रायोनिया एल्ब. (Bryonia Alb.) 30CH – 10 से 12 जून की मात्रा में लेकर थोड़े से पानी में मिलाकर दिन में 4 से 5 बार सेवन करें। इस दवा का सेवन करने से जिम रोगियों की आंत ठीक प्रकार से काम ना करती हो उस अवस्था में या औषधि अच्छा काम करती है।

8. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा 

लाइकोपोडियम (Lycopodium) 30CH – 9 से 10 बूंद की मात्रा में आधा कप पानी में मिलाकर दिन में तीन से चार बार सेवन करें। इस औषधि का सेवन करने से अगर आपका पेट सही प्रकार से साफ ना हो रहा हो और मलद्वार में कुछ अटका अटका सा लग रहा हो तो उस अवस्था में यह औषधि बहुत अच्छा काम करती है।

9. पुरानी कब्ज के लिए होम्योपैथिक दवा 

हाईड्रेस्टिस (Hydrastis can.) Q – 9 से 10 बूंद की मात्रा में दो से तीन बार आधा कप पानी में मिलाकर सेवन करें। इस दवा का सेवन करने से कभी कभी पेट में ऐसा लगता है जैसे कुछ है ही नहीं और अंदर धंसता जा रहा है उस अवस्था में यह औषधि रामबाण का काम करती है।

आवश्यक सूचना 

यदि आप गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं तो अपने चिकित्सा से परामर्श अवश्य लें वैसे तो या उसे भी बहुत अच्छी हैं और अच्छे प्रकार से काम कर करती हैं लेकिन फिर भी आप यदि किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे हैं तो फिर आपको अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

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