पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज, धात रोग के लक्षण, कारण व घरेलू उपचार | dhatu Rog ka gharelu ilaaj

 (धातु) धात रोग के लक्षण, कारण व घरेलू उपचार

Table of Contents

इस रोग को विभिन्न नामों से भी जाना जाता है जैसे- धातु स्राव, वीर्य स्खलनता, प्रमेह रोग, धातु रोग।

धातु रोग से पीड़ित रोगी के जोर लगा कर मल त्याग करने पर अथवा मूत्र त्याग से पूर्व या बाद में वीर्य निकल जाता है। यही “धात रोग” है। धात रोग में रोगी को बार-बार थोड़ा सा वीर्य निकलता है। इसमें रोगी के मन में आत्मग्लानि भर जाती है। और वह विचार करता है कि अंदर ही अंदर मेरा स्वास्थ्य खराब हो रहा है। रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है। यदि हम दूसरे शब्दों में कहें तो बिना लैंगिक उत्थान या उत्तेजना के ही बार-बार वीर्य को अनियंत्रित निकासी होना शुक्र, वीर्य प्रमेह के नाम से भी जाना जाता है। नवयुवकों में धात रोग बहुतायत पाया जाता है।

नीचे हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बताएंगे जिनको करके आप ‘पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज’ कर सकेंगे।

2. धात रोग के कारण वा पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज | dhaat Rog Ke Karan in Hindi

. हस्तमैथुन मुख्य कारण है।

. लंबे समय से कब्ज की शिकायत रहना।

. नशा अधिक करना।

. कामोत्तेजक सामग्री का देखना अथवा पठन-पाठन करना।

. अधिक गर्म प्रकृति का व तीखा भोजन खाना।

. अधिक स्त्री प्रसंग या वेश्या गमन करना। आहार-विहार का टीक या व्यवस्थित ना होना।

. पाचन शक्ति कमजोर होना।

. बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, चरस, भांग, गांजा आदि का सेवन करना।

. दिन भर बेकार बैठे रहना अधिक सोना

. गुड़, शक्कर, मिर्च, खटाई, तीखी वस्तुओं का सेवन करना।

. किसी लड़की से एकांत में बात करते समय, यार दोस्तों से अश्लील किस्सा कहानी सुनते समय, या कामोत्तेजक पत्र-पत्रिका पढ़ते-पढ़ते कामोत्तेजक हो उठना।

. पर्याप्त शारीरिक श्रम ना करना।

. रात दिन आराम पूर्वक बैठे रह कर आनंद में जीवन व्यतीत करना।

. हर समय पलंगिया गद्दे तकीयों पर रहना।

. रात दिन मस्ती पूर्वक खूब  सोने से।

. दूध दही इत्यादि अधिक सेवन करना।

. नए नए अनुभव व्यंजनों का सेवन करना।

. बरसात का नया जल पीना।

. गुड़ या गुड से निर्मित पदार्थ खाना।

. जितने भी कफ कारक अहार विहार है, धात रोग के कारक है।

3. धात रोग के लक्षण | dhaat rog ke lakshan in Hindi

. शरीर में सुस्ती/आलस्य से रहना। aaj

शरीर दुबला होना। सिर में दर्द रहना। चिंता रहना। जोड़ों में दर्द रहना। किसी भी कार्य में मन ना लगना। वीर्य का पतला होना। भोजन की इच्छा ना होना। नींद ना आना। स्वास, खांसी, जी मिचलाना, प्यास की अधिकता। देखो रोग की वृद्धि हो जाने पर मामूली रगड़, साइकिल या घोड़े तथा लड़की/स्त्री का ध्यान मात्र करते ही वीर्य निकल जाना।

धातु रोग में क्या खाएं | dhaat Rog mein kya khayen in Hindi

प्रातः काल नाश्ते में फलों का सेवन करें जो आपके शरीर के लिए लाभकारी होगा।

भोजन हमेशा हल्का करें भूख रखकर ही भोजन करें अधिक मात्रा में यदि आप भोजन का सेवन कर लेते हैं तो फिर आपका पेट भारी-भारी रहेगा और जिसके कारण से समस्या अधिक हो जाती है।

जितना हो सके ऑयली भोजन ना करें खाने में सलाद का अवश्य प्रयोग करें जैसे मूली गाजर शलजम चुकंदर प्याज इत्यादि का प्रयोग करें।

धात रोग नहीं ज्यादा तली भुनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

बाहर की चीजों का सेवन कम से कम करें जितना हो सके हल्का भोजन करें जल्दी से पचने वाला ।

ज्यादा मात्रा में फास्ट फूड का सेवन ना करें घर के शुद्ध सब्जियों का सेवन करें

4. धात रोग और स्वप्नदोष में अंतर | dhaat Rog aur swapnadosh mein antar ine Hindi

धात रोग- धात रोग रोगी को किया जागृतावस्था में ही बिना इच्छा और विचार के मूत्र के साथ मूत्र त्याग करने से पहले या बाद में होता रहता है। धातु सराव रोगियों को प्रायः स्वप्नदोष से ही रोग प्रारंभ होता है। इसमें रोगियों का पाचन संस्थान गड़बड़ आ जाया करता है।

स्वप्नदोष- स्वप्नदोष में सोते हुए वीर्य निकल जाया करता है। स्वप्नदोष तो धात रोग की हल्की से आरंभ की अवस्था है।

स्वप्नदोष का घरेलू इलाज

5. धातु रोग और शीघ्रपतन में अंतर | dhaat Rog aur shighartapn mein antar ine Hindi

धातु रोग- धातु रोग में बिना स्फूर्ति अथवा कामोत्तेजना के शरीर के तत्व धुल-धुल कर मूत्र के साथ आगे पीछे आने लगते हैं। धातु रोग में रोगी को इच्छा भी नहीं करनी पड़ती है, और उसका वीर्य निकल जाता है। और उसका वीर्य निकल जाता है। धातु रोग में रोगी को शीघ्रपतन होना भी स्वाभाविक है।

शीघ्रपतन- शीघ्रपतन में हस्तमैथुन करने के लिए स्त्री मिलाप की इच्छा करते ही वीर्य निकल जाता है। शीघ्रपतन के रोगी को धात रोग का रोगी होना आवश्यक नहीं है।

शीघ्रपतन का घरेलू इलाज

6. पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज | purane se purana dhaat Rog ka ilaaj

धात रोग को आप नीचे बताए गए घरेलू नुस्खों से ठीक करे।

1. ताल मखाना के सेवन से धात रोग नष्ट करें।

 दूध में ताल मखाना मिलाकर सेवन करने से धात रोग नष्ट हो जाता है । 

2. केला और गाय के घी से धात रोग का इलाज करें।

एक नग केला में 6 मासा  गाय का घी मिलाकर सुबह-शाम निरंतर सेवन करने से चंद दिनों में ही धात, प्रादर और धातु विकार नष्ट हो जाते हैं ।इस प्रयोग से यदि रोगी को सर्दी मालूम पड़े तो 4 बूंद शहद मिला लेना चाहिए।

3. गेहूं और मिश्री से ‘पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज’ करें।

 125 ग्राम साफ गेहूं लेकर पानी में भिगो दें और सुबह के समय  पीसकर  मिश्री मिलाकर कपड़े से छानकर सेवन करने से  दिव्य लाभ होता है  प्रयोग कम से कम 1 सप्ताह करके देखें । 

4. बबूल की कोपल और मिश्री से धात रोग का इलाज करें।

1.बबूल की नरम नरम कोपले 1 तोला की मात्रा में लेकर पीस लें तथा इसकी समान मात्रा में पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से स्वप्नदोष, धातु रोग आदि समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं। यदि बबूल की हरी पत्तियां ना मिले तो सूखी पत्तियां आधी मात्रा में लेना चाहिए। (4 मसा की मात्रा में)।

2.बबूल के जड़, तना, फल, फूल, पत्ती, इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बनाकर इसकी आधी मात्रा में पिसी हुई मिश्री मिलाकर एक एक चम्मच सुबह-शाम सेवन करने से कुछ ही दिनों में धात रोग व स्वप्नदोष में लाभ होता है।

बबूल के फायदे

5. शीशम के पत्ते और काली मिर्च तथा पानी से धातु रोग का रामबाण इलाज

2 तोला शीशम के पत्ते, 2 माशॉ काली मिर्च, 250 ML. पानी में पीसकर छानकर सेवन करने से धात रोग ठीक हो जाता है। साथ ही शरीर की गर्मी भी शांत हो जाती है, प्रयोग काल में खटाई मिठाई का परहेज करें।

शीशम के पत्ते को पीसकर मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से धातु रोग में लाभ मिलता है।

6. छोटी दुद्धी और मिश्री से धात रोग में लाभ ले।

छोटी दुद्धि को छाया में सुखाकर इसकी समान मात्रा में मिश्री या शक्कर मिला दे। इसकी एक तोला की मात्रा में खाकर 250 ML. ऊपर से गाय का दूध पीले इस प्रयोग से धात रोग नष्ट हो जाता है।

7. हरड़ के चूर्ण और शहद से धात रोग का इलाज करें।

हरड़ के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से धातु रोग ठीक हो जाता है।

8. सेमल की छाल, शहद और हल्दी चूर्ण से धातु रोग ठीक करें।

सेमल की छाल का रस, शहद और हल्दी चूर्ण के साथ सेवन करने से धातु रोग के साथ साथ सेक्स संबंधित समस्त रोगों में लाभ।

9. शिलाजीत से धातु रोग में लाभ।

1 से 2 माशा की मात्रा में शिलाजीत को लेकर मिश्री के साथ सेवन करने से धात रोग नष्ट हो जाता है साथ ही समस्त रोगों में लाभ।

10. गिलोय, आंवला और गोखरू से धातु रोग का घरेलू इलाज करें।

गिलोय, आमला और गोखरू प्रत्येक को 125 125 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक कूट पीसकर वह कपड़े से छानकर सुरक्षित रख ले। यह 6 मासा का चूर्ण लेकर, 3 माशॉ शहद मैं मिलाकर प्रातः के समय कुछ दिनों तक निरंतर सेवन करने से धात रोग नष्ट हो जाता है, साथ ही वीर्य बलवृद्धि होती है।

11. बबूल के बीज, ताल मखाना, बीजबंद और मिश्री से पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज ।

 बबूल के बीज रहित छाया में सुखा हुई फलियां 1 तोला, ताल मखाना 6 मसा, बीजबंद 3  मसा और मिश्री 3 से 4 तोला लेकर पीसकर छान कर चूर्ण बना ले। 6 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय फांककर ऊपर से गाय का दूध 250 मिली० सेवन करने से समस्त प्रकार के धात रोग नष्ट हो जाते हैं और धात गिरना बंद हो जाता है।

वीर्य बढ़ाने के लिए बबूल के फायदे

12. धात रोग की रामबाण दवा। Dhaat Rog ki ramban dava

सेमल की सुखी मूसली 3 माशा की मात्रा में लेकर कूट पीसकर उसमें समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन कर के ऊपर से गाय का दूध सेवन करने से धात रोग नष्ट होकर बलवृद्धि होती है।

सुबह उठकर मल त्याग कर खाली पेट आम का सेवन करें, ऊपर से दूध में पकाए हुए शोंठ और छुहारे का सेवन करें इस प्रयोग से पुरुषों में वीर्य की वृद्धि होती है।

13. गिलोय और मिश्री से धात रोग का इलाज करें।

गिलोय और मिश्री दोनों 6 माशा की मात्रा चूर्ण में 1 से 2 रत्ती अभ्रक भस्म मिलाकर सेवन करके ऊपर से दूध पीले इस प्रयोग से धात रोग नष्ट हो जाता है।

14. पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज अलसी और मुलेठी से।

भुनी अलसी और मुलेठी दोनों एक 1-1 तोला का क्वाथ निरंतर कुछ दिनों तक सुबह-शाम सेवन करने से धात रोग से छुटकारा मिल जाता है

alsi khane ke fayde

15. चीनी के शरबत और बड़ी इलायची से धात रोग में आराम।

चीनी के शरबत में बड़ी इलायची का चूर्ण डालकर सेवन करने से समस्त धात रोग ठीक हो जाते हैं।

16. धातु रोग का इलाज कच्चे कूलर और मिश्री से।

कच्चे गूलर के फल खाकर ऊपर से मिश्री युक्त दुग्ध पान करने से हृदय की जलन, धात रोग, मूत्र की जलन तथा मूत्र के अन्य रोगों में लाभ होता है।

17.सूखे गूलर और मिश्री से धातु रोग में आराम।

गूलर के सूखे फलों के चूर्ण मिश्री मिलाकर सुबह के समय दूध के साथ 15 दिन सेवन करने से वीर्य संबंधी रोग तथा इसी का ताजा पानी पीने से रक्त प्रदर रोग ठीक हो जाता है।

18. दूध घी और शक्कर से धात रोग नष्ट करें।

दूध में घी और शक्कर समान मात्रा में मिला ले। इसको और ओटकर सेवन करने से धात रोग नष्ट हो जाता है।

19. पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज मिश्री और शहद तथा बंग भस्म से।

मिश्री और शहद के साथ रत्ती भर बंग भस्म सेवन करने से समस्त प्रकार के धात रोग नष्ट हो जाते हैं।

20. ईसबगोल, भूसी और मिश्री से धात रोग का इलाज करें।

इसबगोल भूसी 6 ग्राम और मिश्री 10 ग्राम दोनों को मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से धात रोग में विशेष लाभ होता है।

21. बड़ी इलायची और शहद से धात धात रोकने की दवा।

बड़ी इलायची का चूर्ण 3 मासा की मात्रा में लेकर इस में शहद मिलाकर सेवन करने से धात रोग ठीक हो जाता है।

22. नीम के पत्तों का रस और शहद से धात रोग में आराम।

 नीम पत्र का रस 20 ग्राम में 10 ग्राम मधु मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से धात रोग ठीक हो जाता है।

23.तुखमलंगा और शक्कर युक्त दूध से धात रोग में आराम।

तुखमलंगा 5 ग्राम शक्कर युक्त दूध के साथ सेवन करने से धात रोग ठीक हो जाता है।

24. पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज।

त्रिफला 3 तोला, गुड 2 तोला और कपूर 6 मासा मिलाकर कूट कर 1-1 रत्ती की गोलियां बना लें। यह एक एक गोली पानी के साथ सेवन करने से धात रोग में लाभ होता है।

25. आंवले का रस और शहद से धात रोग को नष्ट करें।

20 ग्राम आंवले का रस और 20 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से धात रोग ठीक हो जाता है।

आंवला खाने के फायदे

26. गिलोय का रस और शहद से धात रोग में आराम।

20 ग्राम गिलोय के रस में 20 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से भी धात रोग नष्ट हो जाता है।

27. ताल मखाने और शक्कर से पुराने से पुराने धात की दवा।

ताल मखाने कूटकर चूर्ण बना लें। असम में समान मात्रा में शक्कर मिलाकर 6-6 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करने से धात रोग नष्ट हो जाता है। मिर्ची खटाई का परहेज करें।

धात रोग में अश्वगंधा के फायदे

28. धात रोग का रामबाण इलाज।

धनिया के गिरी और मिश्री सो सो ग्राम अलग-अलग पीसकर मिला लें यह दवा 6 ग्राम सुबह के समय बासी पानी से सेवन करने के 2 घंटे बाद तक कुछ भी ना खाएं तथा दूसरी मात्रा शाम को 4:00 बजे (सुबह के रखे हुए पानी के साथ खाएं) इस प्रयोग से धात रोग के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं।

28. पेशाब में सफेद पदार्थ आना में लाभ।

सौंफ 10 ग्राम पानी के साथ ठंडाई की तरह पीस छानकर धात रोग के रोगी को कुछ दिन सेवन कराने से लाभ होता है।

वीर्य बढ़ाने के लिए आम खाने के फायदे

29.धात रोग में भूमि आंवला के फायदे 

भूमि आंवला के रस को 20 ग्राम की मात्रा में लेकर दो चम्मच घी मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से धात रोग में लाभ मिलता है।

भूमि आंवला के फायदे

30.धातु रोग में भृंगराज लाभकारी 

भृंगराज के चूर्ण और बबूल के फूल का चूर्ण समान मात्रा में लेकर इसमें मिश्री मिलाकर सुरक्षित रख लें इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से सभी प्रकार के धात रोग में लाभ मिलता है।

भृंगराज के फायदे

31.बेल का पत्ता से ‘पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज’

1.बेल की गिरी 10 ग्राम, अश्वगंधा 10 ग्राम, मिश्री 10 ग्राम, कूट पीसकर चूर्ण बना लें, और 2 ½ ग्राम केशर का चूरा मिलाकर सुरक्षित रख ले, फिर इस चूर्ण की 2 से 3 ग्राम की मात्रा में गुनगुने दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शारीरिक कमजोरी एवं वीर्य बढ़ाने में लाभ होता है।

2.पके हुए बेल के फलों को सुखा कर उनके अंदर का गूदा निकालकर चूर्ण बनाकर दो से 5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से शारीरिक कमजोरी में लाभ होता है।

3.बेल की जड़ का चूर्ण को, मिश्री दोनों को लेकर दूध में मिलाकर सेवन करने से खून की कमी शारीरिक दुर्बलता तथा वीर्य की कमी को दूर करता है।

4.बेलपत्र का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद मिलाकर सेवन करने से वीर्य बढ़ता है और शारीरिक कमजोरी में लाभ होता है।

5.बेल के पत्तों का रस 50 ग्राम, 5 ग्राम जीरा का चूर्ण, 25 ग्राम मिश्री मिलाकर चाय बनाकर सेवन करने से शारीरिक दुर्बलता में लाभ मिलता है

बेल का पत्ता खाने के फायदे

32.धात रोग में बकायन के बीज के फायदे 

बकायन के एक से दो बीजों की गिरी को चावल के पानी में पीसकर उसमें 10ml घी मिलाकर सेवन करने से धात रोग में बहुत ही लाभ मिलता है।

बकायन के बीज के फायदे

33.धातु रोग में बहेड़ा चूर्ण के फायदे

बहेड़ी के छिलके का चूर्ण लेकर उसमें समान मात्रा में पिसी हुई मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से धातु रोग में लाभ होता है।

बहेड़ा चूर्ण के फायदे

34.अजवाइन से ‘पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज’

तिल के तेल को 10 ग्राम की मात्रा में लेकर इसमें 3 ग्राम अजवाइन चूर्ण मिलाकर सेवन करने से प्रमेह रोग में लाभ मिलता है।

अजवाइन खाने के फायदे

35.धात रोग से शारीरिक कमजोरी होने पर अश्वगंधा चूर्ण से ठीक करें 

1.अश्वगंधा के के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से दुर्बल शरीर में जान आ जाती है, या यूं कहें कि शरीर कमजोर हो तो अश्वगंधा बहुत ही लाभकारी साबित होता है।

2.अश्वगंधा चूर्ण को लेकर 10 ग्राम तिल का तेल हुआ 10 ग्राम घी लेकर और 3 ग्राम शहद मिलाकर नित्य सेवन करने से शरीर मोटापा तंदुरुस्त हो जाता है बीमारियां दूर हो जाती हैं तथा इम्यूनिटी भी बढ़ती है। इस प्रयोग को ठंडी के मौसम में करें,

3.अश्वगंधा के चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में लेकर 5 ग्राम मिश्री और 5 ग्राम शहद और 10 ग्राम घी मिलाकर इस मिश्रण को सुबह-शाम ठंठीओ के मौसम में सेवन करने से बूढ़ा व्यक्ति युवक के समान प्रसन्न रहता है।

4.अश्वगंधा की जड़ को लेकर कूट पीसकर महीन चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें, इस चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में गाय के ताजे दूध में घोलकर शुद्ध तिल के तेल मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से निर्बलता दूर होकर शरीर में फुर्ती और तंदुरुस्ती आ जाती है।

5.अश्वगंधा के चूर्ण को 20 ग्राम की मात्रा में लेकर शुद्ध तिल 30 ग्राम की मात्रा में उड़द आठ गुने इन सभी को लेकर कूट पीसकर इसके बड़े बनाकर खाने से शरीर को बल प्राप्त होता है तथा बीमारियों से लड़ने की क्षमता मिलती है।

6.एक ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को लेकर 100 मिलीग्राम मिश्री डालकर घोट ले फिर इसको दूध के साथ सेवन करने से शरीर में वीर्य बढ़ता है और बल भी बढ़ता है।

7.अश्वगंधा चूर्ण और चिरायता 200 ग्राम की मात्रा में लेकर छांव में सुखाकर कूट पीसकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें, फिर इस चूर्ण को 10-10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से शरीर में वीर्य वृद्धि होती है और शरीर मजबूत व मोटा हो जाता है।

अश्वगंधा चूर्ण के फायदे

36.हल्दी से पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज

हल्दी के चूर्ण को 5 से 10 ग्राम की मात्रा में लेकर आंवले के रस और शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सभी प्रकार के धात रोग में लाभ मिलता है।

2.हल्दी के चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में लेकर दूध में मिलाकर सेवन करने से धातु रोग से मुक्ति मिलती है और वीर्य भी बढ़ता है।

37.धातु रोग का रामबाण इलाज

1.आंवला के रस को 20ml की मात्रा में लेकर 1 ग्राम इलायची के दाने और इसबगोल 1 ग्राम बराबर मात्रा में मिलाकर एक एक चम्मच सुबह-शाम सेवन करने से धात रोग और स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।

2.धनिया के पाउडर को 40 ग्राम, मिश्री 20 ग्राम, 10 ग्राम इलायची इन सभी को लेकर कूट पीसकर चूर्ण बनाकर रख ले। 2 ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह शाम ताजे जल के साथ सेवन करने से धात रोग, स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।

3.इलायची के बीजों का चूर्ण, श्वेत मूसली और मिश्री इन सभी को मिलाकर चूर्ण बना कर 2 -3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से नपुंसकता, धातु रोग में लाभ मिलता है।

धातु रोग की जड़ी बूटी

गोखरू का चूर्ण 5 ग्राम और कौंच के बीज का चूर्ण 5 ग्राम इन दोनों को दूध में मिलाकर सेवन करने से करने की क्षमता बढ़ेगी।

शीशम के पत्ते के फायदे धातु रोग में

1.गोखरू के 20 ग्राम फलों को 250ml दूध में उबालकर सुबह-शाम सेवन करने से सेक्स क्षमता बढ़ती है।

2.गोखरू 10 ग्राम एवं 10 ग्राम की मात्रा में लेकर 250ml दूध में उबालकर सेवन करने से पुरुषार्थ बढ़ता है।

3.गोखरू, विदारीकंद और कौंच के बीज बराबर मात्रा में मिलाकर 2 से 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पुरुषार्थ बढ़ता है।

38.शहद और किशमिश के फायदे से पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज

शहद 500ml तथा किसमिस 250 ग्राम की मात्रा में लेकर इन दोनों को एक साथ स्वच्छ कांच के बर्तन में ढक्कन बंद करके रख दे। 2 दिन के लिए रख दें। फिर इसके बाद इसमें से पांच किसमिस निकाल कर प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक महीने तक सेवन करने से धातु रोग, स्वप्नदोष, वीर्य की कमी, शीघ्रपतन, वीर्य पतला, नपुंसकता, इत्यादि लोगों में को जड़ से खत्म करने की औषधि है।

39.धातु रोग का रामबाण इलाज

शतावरी के जड़ का चूर्ण 250 ग्राम की मात्रा में लेकर इसके बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर कूट पीसकर छानकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें, इस चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में 250ml दूध में सुबह-शाम सेवन करने से स्वप्नदोष दूर होकर शरीर को बल मिलता है और धात रोग में भी लाभ मिलता है।

आंवला से धातु रोग का इलाज | aanwala se dhaat Rog ka ilaaj in Hindi

आंवले के चूर्ण को 5 से 10 ग्राम की मात्रा में लेकर तथा इसमें मिश्री स्वाद अनुसार मिलाकर गुनगुने पानी के साथ नियमित रूप से लेने से धात रोग में शीघ्र ही लाभ होता है।

लिंग की कमजोरी में मूली के बीजों के फायदे | penis weakness main muli ke bijon ke fayde in Hindi 

स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, धातु रोग, के कारण लिंग की कमजोरी में मूली के बीजों को तेल में औटाकर इस तेल से लिंग पर मालिश करने से कमजोरी व शिथिलता दूर हो जाती है।

7. धातु रोग की आयुर्वेदिक दवा | dhatu rog ki ayurvedic dava

रस-

चंद्रकला रस।

प्रमेह कुठार रस।

प्रमेह मर्दन रस।

पुष्पधन्वा रस।

भस्म-

बंग भस्म।

मसद भस्म।

अभ्रक भस्म।

कांस्य भस्म।

स्वर्ण भस्म।

राजाव्रत भस्म।

लौह भस्म।

स्वर्ण माक्षिक भस्म।

वटी-

प्रमेहांतक वटी।

शिलाजतु वटी।

अरोग्यवधनी वटी।

सुखदा वटी।

शिखा वटी।

कफ धेनु वटी।

धातु रोग की होम्योपैथिक दवा

3 thoughts on “पुराने से पुराना धातु रोग का इलाज, धात रोग के लक्षण, कारण व घरेलू उपचार | dhatu Rog ka gharelu ilaaj”

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